चार साल 3 महीने में 2574 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई गई : राजेन गोहैन

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सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2014 से लेकर जून 2018 तक 2,574 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई गई। रेल राज्यमंत्री राजेन गोहैन ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा, “रेलवे ने 2014 से लेकर 30 जून, 2018 तक यानी चार साल तीन महीने में 2,574 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई।”

उन्होंने कहा कि रेलवे ने झारखंड में 240 किलोमीटर, कर्नाटक में 235 किलोमीटर, मध्यप्रदेश में 262 किलोमीटर, बिहार में 229 किलोमीटर और आंध्रप्रदेश में 221 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई।

मंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर में 178 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई गई। वहीं, तेलंगाना में 186 किलोमीटर, हरियाणा में 160 किलोमीटर, ओडिशा में 118 किलोमीटर, पश्चिम बंगाल में 86 किलोमीटर और राजस्थान में 73 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई गई।

इसके अलावा छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और पंजाब में भी नई रेल लाइन बिछाई गई। गोहैन ने कहा, “इस समय 180 नई रेल लाइन परियोजना पर कार्य योजना, मंजूरी और कार्य शुरू होने के विभिन्न चरणों में है, जिनमें 3,56,120.17 करोड़ रुपये की लागत से 19,644.8 किलोमीटर लाइन बिछाई जानी है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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