जापान में Corona के 2,502 नए मामले आए

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जापान में 2,502 नए मामलों के साथ गुरुवार को यहां पुष्ट मामलों की संख्या 140,288 तक पहुंच गई है। यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के हवाले से इसकी सूचना मिली है। इस आंकड़े में डायमंड प्रिंसेस क्रूज शिप के 712 मामले शामिल नहीं किए गए हैं, जिसे टोक्यो के पास योकोहामा में क्वॉरंटाइन किया गया था।

जापान में गुरुवार को घोषित 17 नई मौतों के साथ निमोनिया के वायरस से अब तक 2,066 जानें जा चुकी हैं। इसमें से 13 मौतें डायमंड प्रिंसेस क्रूज शिप से दर्ज की गई हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा कि यहां फिलहाल 410 मरीज गंभीर रूप से बीमार हैं, जो या तो वेंटिलेटर्स में हैं या गहन चिकित्सा विभाग में एडमिट हैं।

जापान में महामारी के केंद्रबिंदु के रूप में पहचाने गए टोक्यो में गुरुवार को 481 नए मामले दर्ज हुए हैं, जिन्हें मिलाते हुए राजधानी में मामलों की संख्या 39,079 तक पहुंच गई है। देश के 47 प्रांतों में यहां मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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