हिमाचल प्रदेश में बस किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि

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कोविड-19 महामारी के बीच फंड की कमी दूर करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को बस का किराया 25 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के नेतृत्व में कैबिनेट ने पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के लिए 3 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए प्रति किलोमीटर टैरिफ योजना में किराया बढ़ाने का फैसला किया। पहले 3 किलोमीटर के लिए किराया 5 रुपये के बजाय 7 रुपये होगा।

कैबिनेट ने राज्य में हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन बसों में राज्य के भीतर और बाहर की यात्रा मुफ्त में करने की सांसदों और विधायकों की सुविधा वापस ले ली। लेकिन पूर्व विधायकों और सांसदों के लिए यह सुविधा जारी रहेगी।

पुस्तकालयों के सुचारू संचालन के लिए शिक्षा विभाग में 771 सहायक लाइब्रेरियन के रिक्तपदों को कनिष्ठ कार्यालय सहायक (पुस्तकालय) में परिवर्तित करने का भी निर्णय लिया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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