झारखंड में बिरसा मुंडा की 25 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी

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मुख्यमंत्री रघुबर दास की अध्यक्षता में झारखंड मंत्रिमंडल ने सोमवार को पुराने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 25 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने की मंजूरी दे दी। कारागार को अब एक संग्रहालय में बदला जा रहा है। शहरी विकास सचिव अजय कुमार ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “बिरसा मुंडा की प्रतिमा के साथ, संग्रहालय में राज्य के 10 और स्वतंत्रता सेनानियों की नौ फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।”

झारखंड पुराना बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार को बिरसा मुंडा को समर्पित संग्रहालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कैदियों को 2006 में एक नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया था और इस क्षेत्र को संग्रहालय में तब्दील किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने केंद्रीय लोकसेवा अयोग की प्रारंभिक परीक्षा में पास करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों को एक लाख रुपये देने की भी घोषणा की। इस पैसे से छात्रों को मुख्य परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलेगी।

मंत्रिमंडल ने आंगनवाड़ी सेविकाओं व अन्य के मासिक वेतन में भी बढ़ोत्तरी करने की मंजूरी दे दी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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