कोरोना से लड़ने ओडिशा को 22,267 करोड़ आवंटित : Dharmendra Pradhan

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि ओडिशा को कोरोना से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सहायता स्वरूप 22,267.66 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। प्रधान ने कहा, “ओडिशा को 22,267 करोड़ रुपये की मदद से इस महामारी की वजह से परेशानी झेल रहे हर तबके के लोगों को सहायता मिलेगी।”

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 19,042.44 करोड़ की सहायता आवंटित की है। साथ ही कोरोना से निपटने के लिए सपोर्ट पैकेज के रूप में 7,51,930 टन चावल, 44,130 टन दाल, 68.79 लाख एलपीजी सिलेंडर मुहैया कराई है।

प्रधान ने कहा कि पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 3.17 करोड़ लाभुकों को प्रति माह 5 किलोग्राम चावल मुहैया कराया गया है।

ओडिशा में 85.20 लाख महिलाओं के जन धन खातों में 1,258.02 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। इसके अलावा राज्य में 20.3 लाख पीएम किसान लाभुकों को 400.63 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई है।

मंत्री ने कहा कि करीब 20.83 लाख निर्माण मजदूरों को बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर फंड के तहत 312.49 करोड़ रुपये दिए गए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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