दिल्ली में 2 कश्मीरी आईएस आतंकवादी गिरफ्तार

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जम्मू एवं कश्मीर के रहने वाले दो संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादियों को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से दो पिस्तौल व 10 कारतूस जब्त किए गए हैं। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

पुलिस उपायुक्त , विशेष सेल, पीएस कुशवाह ने कहा, “दोनों संदिग्ध शोपियां के गनापोरा गांव से हैं। इन्हें गुरुवार की रात लाल किले के एक बस स्टाप के पास से गिरफ्तार किया गया। ये उत्तर प्रदेश के अमरोहा से एकत्र किए गए हथियारों के साथ जम्मू एवं कश्मीर वापस जाने के लिए एक बस में सवार थे।”

कुशवाह ने कहा कि गिरफ्तार लोगों पर वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क (आईएस) की जम्मू एवं कश्मीर इकाई से जुड़े होने का संदेह है। आतंकवादी समूह आईएस की जम्मू एवं कश्मीर में उपस्थिति से राज्य पुलिस इनकार करती रही है।

हालांकि, कश्मीर घाटी में युवाओं द्वारा अक्सर आईएस द्वारा उपयोग किए जाने वाले काले झंडे को लहराते देखा जाता है। कुशवाह ने कहा, “परवेज अहमद लोन (24) व जमशीद जहूर (19) दोनों क्रमश: एम.टेक व पीजी डिप्लोमा के छात्र हैं।” लिस ने कहा कि लोन के भाई की मौत राज्य में जनवरी में एक मुठभेड़ में हुई थी। वह अपने भाई से प्रेरित है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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