‘Rahna Hai Tere Dil Mein’ के 19 साल पूरे : दिया मिर्जा ने याद किए वो दिन

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फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ के 19 साल पूरे हो गए हैं, इस मौके पर फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री दीया मिर्जा ने याद करते हुए कहा कि वह एक खूबसूरत यात्रा थी।

इंस्टाग्राम पर उन्होंने फिल्म का एक वीडियो साझा किया, जिसमें आर.माधवन और सैफ अली खान भी थे।

दीया ने इसे कैप्शन लिखा, “यह मेरे दिल के बहुत करीब है। यह मेरी पहली फिल्म थी और उसे 19 साल हो गए हैं। प्यार की यह बेहद खूबसूरत यात्रा थी।”

इस फिल्म के गाने ‘जरा जरा’, ‘सच कह रहा है’ और ‘दिल को तुमसे’ बहुत लोकप्रिय हुए थे।

माधवन ने कुछ समय पहले आईएएनएस से कहा था, “जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो यह फ्लॉप थी। लोगों ने इसे डिजास्टर (आपदा) तक कहा। लेकिन सिनेमाघरों से निकलने के बाद यह धीरे-धीरे मशहूर हुई। इसके गाने मशहूर हुए, लोग इसके गाने गा रहे थे उन पर डांस कर रहे थे।”

इस मौके पर जैकी भगनानी ने लिखा, “यह मेरी पहली फिल्म थी, जिससे मैंने असिस्टेंट के तौर पर सेट पर काम करना शुरू किया था। तब मैं केवल 15 साल का था।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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