परिजनों से अलग कि गए 171 बच्चे अब भी अमेरिकी हिरासत में

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अमेरिका में परिवारों से अलग किए गए कम से कम 171 बच्चे अब भी सरकार के कब्जे में हैं। एक न्यायाधीश ने दस्तावेज न होने के कारण सीमा पर अलग किए गए आव्रजक परिवारों को फिर से मिलाने का सरकार को आदेश दिया था, जिसके चार महीने बीत जाने के बाद भी बच्चे अमेरिकी हिरासत में रह रहे हैं। एक अदालती दस्तावेज से इस बात की जानकारी मिली है। सीएनएन के मुताबिक, अदालती दस्तावेज में गुरुवार को कहा गया है कि जो बच्चे हिरासत में हैं, उनमें से सात को उनके देश में उनके परिवारों से मिलाने की तैयारी की जा रही है और अमेरिकी सरकार छह बच्चों को अमेरिका में उनके परिजनों के पास छोड़ने पर कार्य कर रही है।

अधिकारी ने कहा, “लेकिन अलग किए गए परिवारों के 146 बच्चे, जो हिरासत में हैं, उन्हें उनके परिजनों से नहीं मिलाया जा सकेगा, क्योंकि इनमें से कुछ के परिजनों ने फिर से मिलने से इंकार कर दिया है। साथ ही अधिकारियों ने पाया है कि ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि कुछ के परिजन स्वस्थ नहीं हैं या खतरा पैदा कर सकते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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