दिल्ली से 150 प्रवासी बसों से पंजाब रवाना

0

दिल्ली सरकार ने रविवार को लॉकडाउन में फंसे 150 लोगों को बसों के जरिया पंजाब रवाना किया। इसके पहले यहां से दो रेलगाड़ियां प्रवासियों को लेकर बिहार और मध्य प्रदेश के लिए रवाना हुईं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, “दिल्ली सरकार फंसे हुए प्रवासियों को उनके मूल राज्यों में भेजने के लिए कदम उठा रही है।”

पंजाब के प्रवासी नेहरू विहार स्थित सर्वोदय विद्यालय में अस्थायी आश्रय में रह रहे थे। चिकित्सा दल द्वारा सभी की जांच की गई। सभी को भोजन, मास्क और सैनिटाइजर प्रदान किए गए।”

पिछले सप्ताह दिल्ली सरकार ने मध्य प्रदेश और बिहार के लगभग 1,050 और 1,200 प्रवासियों को विशेष ट्रेनों से भेजा था।

न्यज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleकोविड-19 : गौतमबुद्धनगर में 2 नये मामले, सीआरपीएफ जवान सहित 14 मरीज स्वस्थ
Next articleइस जन्मदिन पर सई पल्लवी का जश्न मनाने का ईरादा नहीं
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here