देश में बिजली की मांग में आई 13 प्रतिशत की कमी

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जयपुर। गुजरात और महाराष्ट्र के इन्डस्ट्रीयल ऐरिया से बिजली माग कम होने से देश की कुल बिजली की मांग कम हो गई है। अक्टूबर में देश की कुल बिजली की मांग में 13 प्रतिशत की कमी आई है। मांग में इतनी बडी कमी कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाती है। इस सब से मंदी के कारण मांग में भारी कमी की ईशारा भी होता है।

आपको बता दें, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग घटकर 98 बिलियन यूनिट रह गई, जो पिछले साल इसी महीने में 113 बिलियन यूनिट थी। यह कम बिजली की मांग में कमी का लगातार तीसरा महीना है जो अगस्त से धीमा हो गया है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने इसे देर से बारिश और अनुकूल मौसम की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।

एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स के डायरेक्टर जनरल अशोक खुराना ने मीडिया से कहा कि मंदी सामान्य आर्थिक मंदी का लक्षण है और यह पावर डिस्कॉम के वित्त के लिए सबसे खराब है क्योंकि ग्राहकों की ग्राहकी कम हो गई है। डिस्कॉम द्वारा बकाए का भुगतान नहीं करने, ईंधन की कमी, वित्त और अन्य नियामकीय मंजूरियों के कारण बिजली क्षेत्र की अधिकांश संपत्तियां पहले से ही तनावग्रस्त हैं।

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए वितरण राशि बढ़कर 80,260 करोड़ रुपये हो गई है, जिसमें से 61,144 करोड़ रुपये का बकाया है।

गौरतलब है कि देश में इस तरह के माहौल, देश को एक भयंकर आर्थिक संकट की ओर ले जाता नजर आ रहा है। बिजली जैसी उपभोक्ता राशी की मांग में कमी आ रही है जिसका सीधा सा मतलब है लोग मजबूरी में कम में काम चलाने का प्रयास कर रहे है।

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