श्रीनगर में कोरोनावायरस के 13 मरीज पूरी तरह ठीक हुए

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कोरोनावायरस से संक्रमित 13 मरीजों को मंगलवार को एक अस्पताल से घातक संक्रमण से पूरी तरह से उबरने के बाद छुट्टी दे दी गई। श्रीनगर में चेस्ट रोग अस्पताल के विभाग प्रमुख नावीद नजीर शाह ने दोहरी जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया, “कोरोनावायरस से 13 पॉजिटिव रोगियों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है।”

उन्होंने कहा, “यह एक संतोषजनक क्षण है, 13 मरीजों को छुट्टी दे दी गई है और उन्हें होम आइसोलेशन में रहने के सुझाव के साथ, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने, घर में रहने, सुरक्षित रहने, जैसे सुझावों का पालन करने को कहा गया है। एक साथ हम सभी चुनौतियों को पार कर सकते हैं।”

कल तक 16 पॉजिटिव मामले, जम्मू डिवीजन में नौ और कश्मीर डिवीजन में सात, पूरी तरह ठीक हो गए, और उन्हें जिन अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, वहां से होम क्वारंटीनन के लिए छुट्टी दे दी गई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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