लॉकडाउन से बेरोजगारी की मार! देश में 12 करोड़ से ज्यादा लोगों की गई नौकरी

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सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने अनुमान जताया है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन से देश में 12.2 करोड़ लोगों को बीते महीने अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। CMIE एक निजी संस्था है जो बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े देती है। इसके साथ अन्य शोध भी करती है। इसकी रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन का दिहाड़ी मजदूरों और छोटे कारोबारियों पर बुरा असर पड़ा है।

सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले लोगों, रिक्शा-हाथगाड़ी चलाने वालों और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले कामगारों पर लॉकडाउन का बुरा असर देखने को मिला है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसारस भारत में 1.2 करोड़ लोग गरीबी रेखा के दायरे में फिसलकर आ गए हैं। इसके चलते उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में 4.9 करोड़ लोग अत्याधिक गरीबी के दायरे में आ गए हैं।

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। इस बीच प्रवासी मजदूरों का पहली बार शहरों से गावों की तरफ पलायान देखा गया। लॉकडाउन के चल रहे चौथे चरण में सरकार ने कई रियायतें दी है। इसके बाद उद्योग धंधों और कारोबार फिर से खुले हैं। हालांकि, पूरी तरह से उद्योग सेक्टर शुरू नहीं हो सका है।

CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रोजगार दर मई में 2 फीसदी से बढ़कर 29 फीसदी पर जा पहुंची हैं। इससे पहले अप्रैल में ये 27 प्रतिशत पर थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउऩ के 25 मार्च से शुरू होने के कारण देश की करीब 12.20 करोड़ लोगो को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

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