पाकिस्तान के पंजाब में 105 साल के वृद्ध ने कोरोना को हराया

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पाकिस्तान में स्थित पंजाब प्रांत के रहने वाले एक 105 वर्षीय वृद्ध ने कोरोनावायरस से जंग में सफलतापूर्वक जीत हासिल की है और अब उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। मीडिया रपट में इसकी जानकारी मिली है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स का नाम फजल रऊफ है। वह पाकिस्तान सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं और युद्ध में भी शामिल रहे हैं। कोरोनावायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद से वह अस्पताल में क्वॉरंटाइन में थे।

गुरुवार को उनमें कोविड-19 की जांच फिर से की गई जिसमें उनका रिपोर्ट नेगेटिव आया।

शुक्रवार को वह अपने घर लाए गए और अब उनकी स्थिति सामान्य है।

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यहां संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 221,896 हो गई है। 4,551 मरीजों की मौत हो चुकी है और 113,623 ठीक हो चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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