10वें ‘इंडिया रनवे वीक’ के लिए 10 डिजाइनर घोषित

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इंडियन फेडरेशन फॉर फैशन डेवलपमेंट (आईएफएफडी) इंडिया रनवे वीक ने आगामी फैशन उत्सव के लिए 10 नई पीढ़ी के फैशन डिजाइनरों के नाम घोषित किए हैं। ये डिजाइनर आगामी फैशन पर्व पर अपने डिजाइन प्रदर्शित करेंगे।

इंडिया रनवे वीक के 10वें संस्करण में शामिल होने वाले डिजाइन लेबल अंकिता यादव, स्तिुति और विवेक क ‘अक्र्य’, उदयन डालमिया, सुनिधि गोराड़िया, शेफाली ढाका सिरोही, ट्विंकल परेजा, तृप्ति चांडक, ओइंड्रिला दास ‘सिध’ और अंबिका व आशिमा एस. कोचर है।

आईआरडब्ल्यू की फैशन निदेशक किरण खेवा का कहना है कि नई पीढ़ी की कल्पनात्मक रचनाएं आज के फैशन का आधार बन गई हैं।

उन्होंने कहा, “यहां से हर सत्र में कई नए डिजाइनर निकले हैं और हम यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि युवा डिजाइनरों के खजाने में समर 2018 में हमारे लिए क्या है। फैशन उद्योग का पूरा ध्यान इन नई पीड़ी के डिजाइनरों पर होता है, क्योंकि वे अपनी प्रदर्शनी में नयापन और रचनात्मकता चाहते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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