मैसूर में 10 दिवसीय दशहरा महोत्सव शुरू, जानिए !

0
171

यह शहर बेंगलुरू से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित है। जिले के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “चामुंडेश्वरी मंदिर में पूजा के साथ बड़े स्तर पर इस महोत्सव की शुरुआत हुई। इसके बाद शाही अंबा विलास महल में महोत्सव का उद्घाटन हुआ।”

इंफोसिस फाउंडेशन की प्रमुख सुधा मूर्ति ने वैदिक भजनों और भक्ति संगीत के प्रतिपादन के दौरान देवता की पूजा कर इस उत्सव की 408वीं वर्षगांठ का उद्घाटन किया।

सुधा के पति और इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति, मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी तथा उनके मंत्रियों सहित कई अधिकारी और सैकड़ों लोग मंदिर में और उसके बाद महल में उपस्थित रहे।

सुधा ने कहा, “मैं दशहरा महोत्सव का आयोजन कर बेहद खुश हूं। यह मेरे लिए सम्मान की बात है।”

इस महोत्सव का इतिहास बेहद पुराना है। 16वीं सदी में वोडेयार राजा इस महोत्सव को मनाया करते थे। सुधा ने कहा कि राज्य सरकार को युवा पीढ़ियों को प्रेरित करने हेतु इस कथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए।

सुधा ने कहा, “दशहरा महोत्सव का इतिहास 400 साल पुराना है। ऐसे में यह गणेश उत्सव और दिवाली महोत्सव से अलग है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleइंडोनेशिया : भूकंप, सुनामी में मृतकों की संख्या 2045 हुई
Next articleनजरंदाज करने पर गंभीर हो जाता है सोरियाटिक आर्थराइटिस (विश्व आर्थराइटिस दिवस 12 अक्टूबर पर विशेष)
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here