सिटी बैंक के 65,750 करोड़ के घोटाले में नया मोड़ दिखाई दे रहा है देखिये खास रिपोर्ट

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सिटीबैंक के सबसे बड़े ब्लंडर में दो विप्रो कर्मचारियों का नाम सामने आ रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक रेवलॉन से जुड़े लोन मामले में सिटीबैंक एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंट था. अमेरिकी बैंक सिटीबैंक से पिछले साल बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी गलतियों में से एक हुई थी. उसका नतीजा ये हुआ है कि सिटीबैंक ने करीब 500 मिलियन डॉलर गंवा दिए हैं. बैंक ने पिछले साल 900 मिलियन डॉलर (65,750 करोड़ ) गलती से कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन को उधार देने वालों को ट्रांसफर कर दिए थे.सिटीबैंक ने कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन के लोन एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंट के तौर पर काम करते हुए 10 वित्तीय कंपनियों को 900 मिलियन डॉलर भेज दिए थे. इन कंपनियों के कंसोर्टियम ने रेवलॉन को टर्म लोन दिया था. असल में सिटीबैंक को इन्हें 7.8 मिलियन डॉलर के ब्याज का पैसा देना था. हालांकि, बैंक ने गलती से 900 मिलियन डॉलर प्रिंसिपल अमाउंट इन कंपनियों को भेज दिया. इनमें से कुछ कंपनियों ने पैसा वापस कर दिया लेकिन कुछ ने नहीं किया.

ऐसे हुआ सबसे बड़ा ब्लंडर दरअसल मामला अगस्त 2016 का है जब सिटी बैंक ने कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन को 1.8 मिलियन डॉलर का लोन दिया था. कंपनी ने एक बड़े ब्रांड का अधिग्रहण करने के लिए यह लोन लिया था. लेकिन बैंक के सॉफ्टवेयर एरर के कारण 500 मिलियन डॉलर की रकम गलती से ज्यादा ट्रांसफर हो गई. बैंक के मुताबिक उनका सॉफ्टवेयर आउट ऑफ डेट होन के कारण यह एरर आया जिसके कारण रकम गलती से कंपनी को ट्रांसफर हो गया. लेकिन कंपनी ने इस रकम को लौटाने से मना कर दिया. उसके बाद मामला अमेरिकी कोर्ट में चला गया. कोर्ट ने भी माना कि यह बैंक का सबसे बड़ा ब्लंडर है.

कोर्ट ने क्या कहा करीब 4 साल से कोर्ट में चल रहे इस मामले पर अमेरिकी कोर्ट ने साफ कह दिया है कि यह बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा ब्लंडर है. इसका मतलब साफ है कि अब सिटी बैंक को अपनी इस गलती की बड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी और 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 3650 करोड़ रुपए से हाथ धोना पड़ेगा. इससे पहले भी बैंकिंग सेक्टर में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं लेकिन रकम के मामले में यह अबतक की सबसे बड़ी घटना है.

कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं बैंक एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक सिटी बैंक के स्पोक्सपर्सन ने कहा है कि हम कोर्ट के इस फैसले से पूरी तरह असहमत हैं. यह रकम एक गलती की वजह से ट्रांसफर हुई है और हम इसकी रिकवरी के कोशिश करते रहेंगे. जबकि कंपनी ने 1991 के एक केस का हवाला देते हुए कहा कि अगर बैंक गलती से किसी के अकाउंट में वायर ट्रांसफर करता है तो इस गलती की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है न कि उसकी जिसके खाते में पैसे गलती से ट्रांसफर हुए है.

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