सरकारी और प्राइवेट बैंकों की दूरी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे सरकारी बैंक अधिकारी

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बैंक अधिकारियों के संगठनों ने निजी क्षेत्र के बैंको को कर संग्रह (Tax Collections), पेंशन भुगतान (Pension Payment) और लघु बचत योजनाओं (Small saving schemes) समेत सरकारी कारोबार में शामिल होने की अनुमति देने के केंद्र के निर्णय का विरोध किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा था, ‘निजी बैंकों को सरकार से जुड़े कामकाज और योजनाओं को क्रियान्वित करने पर लगी रोक हटा ली गई है. अब सभी बैंक इसमें शामिल हो सकते हैं.

प्राइवेट सेक्टर के बैंक अब भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास, सरकार के सामाजिक क्षेत्र में उठाए गए कदमों और ग्राहकों की सुविधा बेहतर बनाने में समान रूप से भागीदार हो सकते हैं.’ गुरुवार को संयुक्त विज्ञप्ति (Joint press statement) में बैंक अधिकारियों के चार संगठनों ने कहा, ‘यह हास्यास्पद है कि निजी क्षेत्र के बैंकों को प्राथमिक क्षेत्र को कर्ज देने के नियम, ग्रामीण/छोटे कस्बों में शाखा विस्तार, कृषि कर्ज जैसे नियमों के मामले में छूट दी गई हैं. वहीं सार्वजिक क्षेत्र के बैंकों को प्राथमिक क्षेत्र को ऋण, कृषि क्षेत्र को कर्ज समेत विभिन्न नियमों का अनुपालन करना होता हैपीएम मोदी ने कहा कि निजी क्षेत्र अपने साथ निवेश, वैश्विक सर्वश्रेष्ठ व्यवहार, बेहतरीन प्रबंधक, प्रबंधन में बदलाव और आधुनिकीकरण लाता है.

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बिक्री से जो पैसा आएगा उसका इस्तेमाल जन कल्याण योजनाओं मसलन जल और साफ-सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया जाएगा. सरकार निजीकरण की तरफ से तेजी आगे बढ़ रही है. बजट 2021 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि दो सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस सेक्टर की कंपनी का निजीकरण किया जाएगा.

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