म्यूचुअल फंड में निवेश के मामले में भारतीय सबसे पीछे देखे की ऐसा क्यों है

0

सावधि जमा (एफडी) और छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती के बाद छोटे निवेशक तेजी से म्यूचुअल फंड का रुख कर रहे हैं। इसकी वजह म्यूचुअल फंड में परंपरागत जमा योजनाओं के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलना है। इसके बावजूद म्यूचुअल फंड में निवेश के मामले में भारतीय निवेशक सबसे पीछे हैं। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।

भारत में जबरदस्त विकास की क्षमता रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के साल में छोटे निवेशकों द्वारा म्यूचुअल फंड का रुख करने से प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) 30 खरब रुपये पर पहुंच गया है। इसके बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विकास के दरवाजे खुले हैं। आने वाले समय में म्यूचुअल फंड में निवेशकों का रुझान और तेजी से बढ़ेगा जो एयूएम को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाने का काम करेगा। अभी भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार विकास की दौर में है।

अमेरिकी इक्विटी निवेश में सबसे आगे शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश में अमेरिकी दुनिया में सबसे आगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अपने जीडीपी का 75 फीसदी रकम इक्विटी मे लगाते हैं। वह यह निवेश सीधे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के माध्यम से करते हैं। वहीं, दूसरे पायदान पर कनाडा, तीसरे पर फ्रांस, चौथे पर ब्राजील और पांचवें पर ब्रिटेन है। भारत अभी शीर्ष 10 देशों में भी शामिल नहीं है।

24 से 47 फीसदी तक सालाना रिटर्न कोरोना संकट के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। हालांकि, उसके बाद से बाजार में तेजी का दौर जारी है। इसका फायदा म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी हुआ है। कई म्यूचुअल फंड ने 24 फीसदी से लेकर 47 फीसदी तक का सालाना रिटर्न दिया है। आदित्य बिरला का असेट अलोकेटर फंड ने एक साल में 24.67% का रिटर्न दिया है। वहीं, मिराए एसेट मिडकैप फंड, प्रिंसिपल मिडकैप फंड और बीओआई एक्सए स्मॉलकैप फंड ने 47 फीसदी तक रिटर्न दिया है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here