Congress: पुड्डुचेरी में सरकार गिरने से घटी कांग्रेस बची खुची साख

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पुड्डुचेरी में सोमवार को कांग्रेस शासित सरकार गिर गयी और इसके साथ ही में पार्टी की साख पर भी अब आंच बन आई है। देशभर में बात की जाए तो केवल अब पंजाब राजस्थान और छत्तीसगढ ही ऐसे राज्य बचे है जहाँ पर पार्टी की खुद के दम पर सरकार है। हालाँकि थोड़ी सी राहत पार्टी को पंजाब चुनाव में मिली जीत से मिली है लेकिन पार्टी के सामने फिलहाल बहुत बड़ी बड़ी चुनौतियां खड़ी है जिससे बाहर निकलना पार्टी के लिए काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

 

आपसी कलह से गंवाया एमपी

साल 2019 में हुए आम चुनावों के बाद से पार्टी काफी कमजोर पड गई है।2019 के बाद हुए हर चुनाव में उसका प्रदर्शन काफी शर्मनाक रहा है।  बीते साल पार्टी ने अपने हाथ से मध्य प्रदेश आपसी कलह के चलते गंवा दिया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही पार्टी की वहां से सत्ता भी छूट गयी। मध्य प्रदेश में कांग्रेरस पार्टी के भीतर चल रहे गुटबाजी का फायदा उठाते हुए भाजपा ने यहां हुए उपचुनावों में जीत हासिल करते हुए अपनी सरकार बना ली।

दिल्ली और बिहार में भी नहीं कर पाई कमाल

मध्य प्रदेश में सत्ता से हाथ धोने के बाद पार्टी से दिल्ली बिहार के चुनाव में कमाल की उम्मीद थी लेकिन इसमें भी पार्टी के हाथो निराशा ही लगी। और उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली में जहां पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली तो वहीं दूसरी और बिहार में पार्टी चौथे स्थान पर रही और महागठबंधन की हार का मुख्य कारण भी उसे ही माना गया ।   इन तीन राज्यों के अलावा कांग्रेस महाराष्ट्र में शिवसेना और राकांपा एवं झारखंड में झामूमो के साथ सत्ता में तो है लेकिन दोनों ही जगहों पर उसकी स्थिति ख़ास अच्छी नहीं है।

नहीं थम रहा भीतरी असंतोष

पार्टी के अंदरूनी स्तर पर भी कमजोर ढीली पड गयी है। यही वजह है की उसके कार्यकर्ता एक के बाद के उसका दामन छोड़ रहे है। वहीँ कई लोग पार्टी के कमजोर प्रदर्शन का कारण आलाकमान की वोट बटोरने की क्षमता को कमजोर पड़ना बताते है। इससे पूर्व गुलाब नबी आजाद सहित 23 नेताओ ने भी एक चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी पार्टी आलाकमान से जाहिर की थी।  ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की क्या पार्टी के हित में सोचते हुए पार्टी आलाकमान कुछ अच्छा फैसला लेते हुए पार्टी में कोई बदलाव करता है या नहीं।

 

 

 

 

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